सट्टा मटका खेलों की शुरुआत रतन खत्री ने की थी। उन्हें ही सट्टा मटका किंग कहा जाता है। उन्होंने 70 के दशक में इस खेल को जन्म दिया। शुरुआत में इस खेल को तो लोगों ने खूब पसंद किया लेकिन समय के साथ साथ इस खेल को चाहने वालों की तादाद कम होती गई। इसमें परिणाम का इंतज़ार करना पड़ता रहा तथा दिमागी तौर पर इस खेल को बेहतरीन तरीके से खेला जा सकता था। उस दौरान लोगों को Satta Matka से बेहतर विकल्प मिले। जिनमें कम समय, कम लागत में असीमित फायदा मिलता था। जिसके चलते सटका मटका अपनी लोकप्रियता खोता गया।
भारत में जुआ एक लत माना जाता है और जिस समाज मे लत शब्द को ही बुरा माना जाए तो भला वहां जुआ जैसे खेल ज्यादा विकसित नहीं होते थे। साथ ही साथ इस खेल में दिमाग का प्रयोग ज्यादा होता था और जो व्यक्ति गणित में अच्छा होता था वही इस खेल को बेहतर तरीके से समझ सकता था और मुनाफा कमा लेता था जिससे बाकी लोग इस गेम में हार का मुंह ताकते रह जाते थे।
Satta Matka games were started by Ratan Khatri. He is called the Satta Matka King. He gave birth to the sport in the 70s. Initially people liked this game very much but with time the number of people who want this game decreased. One had to wait for the result in this and mentally the game could have been played in the best way. During that time people got better options than Satta Matka. In which unlimited benefits were available in less time, less cost. Due to which Satka Matka lost its popularity.
सट्टा मटका भाग्य के साथ दिमाग का खेल
जुआ भाग्य का खेल माना जाता है लेकिन सट्टा मटका भाग्य के साथ साथ दिमाग से खेला जाता है। अगर आपको अनुमान लगाने का बेहतरीन अनुभव हैं और आप अंको एवं आंकड़ों को बेहतरीन तालमेल से समझ सकते हैं तो सटका मटका ( सटकी मटकी ) खेल आपको रातों रात अमीर बना सकता है। इस खेल के निर्माता रतन खत्री Delhi Bazaar Satta King गेम के किंग माने जाते हैं जिन्होंने इस खेल से करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाया और साथ साथ satta matka tips देकर कई लोगों को फर्श से अर्श तक ले गए है।
आपको सट्टा मटका गेम खेलने के लिए पूर्णतः भाग्य पर ही निर्भर नहीं रहना होगा। आपको अपनी बुद्धिमत्ता का प्रयोग करके यह खेल खेलते हुए अंको का चालाकी से चयन करना है इससे आपके जीतने के अधिकाधिक उम्मीदें होगी। आपको एक बार फिर याद दिला दें कि Satta Matka खेल भारत मे पूर्णतः प्रतिबंधित है यदि आप किसी भी Satta Matka गेम को खेलते हुए पाए गए तो आपको तत्काल प्रभाव से गिरफ्तार किया जाएगा और आपसे जुर्माना भी वसूला जाएगा।
जुआ अधिनियम 1867
फिर भी लोग इसे कानून की नाक के नीचे खेलते है। भारत के अलग अलग राज्यों में कुछ खेलों पर पैसा लगाने की छूट है जैसे गोवा में कैसिनो को वैद्य किया गया है। हालांकि अंग्रेजो द्वारा पारित एक कानून 1867, जोकि सार्वजनिक जुआ अधिनियम है यह बाध्य करता है कि कोई भी व्यक्ति न जुआ खेले और न ही जुआ खिलाये।
कौन है Satta Matka किंग?
ट्रेडिशनल मटके के जन्मदाता रतन खत्री को कहा जाता है। इन्हें ही मटका किंग के नाम से लोग पहचानते हैं। रतन खत्री की प्रतिदिन की औ 1 करोड़ रुपये से अधिक की थी। उन्हें मटके का बेताज बादशाह कहा जाता था। 2020 को रतन खत्री की मृत्यु हो गयी थी।
विभाजन के समय रतन खत्री कराची से मुंबई आये। इस दौरान मुम्बई में अंडरवर्ल्ड का साया था और सट्टा कारोबार भी खूब फल फूल रहा था। तब रतन खत्री ने इस गेम में की शुरुआत की जिसमें मटके के अंदर पर्ची डाली जाती थी। उस समय न तो इंटरनेट का जमाना था और न ही मोबाइल फोन का
उस समय टेलीफोन ही सूचना भेजने की सहारा था। सटकी मटकी का रिजल्ट आते ही कुछ ही देर में यह पूरे देश में फैल जाता था। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है की मटके की लोकप्रियता कितनी थी।
उस समय भारत मे टेलीफोनिक शुरुआत दौर था। यदि रात्रि 9 बजे के बाद आप किसी को फोन भी करना चाहें तो नहीं कर सकते थे। क्योंकि सट्टे मटके लोकप्रियता की की वजह से सारी लाइनों पर सट्टेबाज होते थे जो एक दूसरे को लकी नम्बर बता रहे होते थे। हालांकि रतन खत्री की सफल सट्टे के पीछे कल्याणजी भगत का भी हाथ था। कल्याण जी भगत सीधे साढ़े आदमी थी वे कच्छ से मुम्बई गए और वहां राशन की दुकान चलाते थे। अपनी दुकान पर आने वाले ग्राहकों के मुह से वे न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज की बातें सुनते थे तब उन्हें लगा कि सट्टे के व्यापार में तगड़ा स्कोप है। इसके बाद रतन खत्री और कल्याण जी भगत पार्टनर हो गए और सट्टा मटका चल निकला।